हर पौधा हरा था मगर उसमें ख़ुशबू मोहब्बत की नही आ रही थी, हर कोई देख रहा था उसे ज़िंदगी की तरह मगर उसे ज़िंदगी नही बुला रही थी ।

हर पौधा हरा था मगर उसमें ख़ुशबू मोहब्बत की नही आ रही थी, हर कोई देख रहा था उसे ज़िंदगी की तरह मगर उसे ज़िंदगी नही बुला रही थी ।

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