कुबूलियत के लिए बस एक लम्हा ही काफी है मुहब्बत गर न हो सजदे में तो कहां तलाफी है

कुबूलियत के लिए बस एक लम्हा ही काफी है मुहब्बत गर न हो सजदे में तो कहां तलाफी है

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