इन रंज-ओ-गम की महफ़िल से नही है अब कोई गिला. जब खुद से राब्ता नही तो तन्हाई से क्यूँ हो कोई गिला...

इन रंज-ओ-गम की महफ़िल से नही है अब कोई गिला. जब खुद से राब्ता नही तो तन्हाई से क्यूँ हो कोई गिला...

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