बुलंद है हर शख्स जो कहता है मैं नहीं सिर्फ जिंदगी है रोई... काश वो पत्ता भी शाख से टूटा हुआ कह पाता मैं खोया नहीं... तभी तो तन्हाई भी मुझपे रोई !

बुलंद है हर शख्स जो कहता है मैं नहीं सिर्फ जिंदगी है रोई... काश वो पत्ता भी शाख से टूटा हुआ कह पाता मैं खोया नहीं... तभी तो तन्हाई भी मुझपे रोई !

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