मुझे भी ख़ुद न था एहसास अपने होने का तिरी निगाह में अपना मक़ाम खोने तक!

मुझे भी ख़ुद न था एहसास अपने होने का तिरी निगाह में अपना मक़ाम खोने तक!

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