सियासत कर रहे है हम पर वो जिसे ज़िंदगी में शिकस्त दिया करते थे,बदल देते थे तूफ़ानो का रूख जब ज़मीन प रहकर आसमान को देखा करते थे ।

सियासत कर रहे है हम पर वो जिसे ज़िंदगी में शिकस्त दिया करते थे,बदल देते थे तूफ़ानो का रूख जब ज़मीन प रहकर आसमान को देखा करते थे ।

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