बहुत बेग़ैरत है ये दुनिया जो अच्छो अच्छों को रुला देती है,तोड़ देती हैं रिश्ता ख़ुद से जब ख़ामोशी को पनाह देती है ।

बहुत बेग़ैरत है ये दुनिया जो अच्छो अच्छों को रुला देती है,तोड़ देती हैं रिश्ता ख़ुद से जब ख़ामोशी को पनाह देती है ।

0 comments: