मैखाने में बैठे थे और महफ़िल सजाने लगे, हम देखते रह गये उनके चेहरे को जब वो निगाहे मिलाकर हमसे निगाहे चुराने लगे ।

मैखाने में बैठे थे और महफ़िल सजाने लगे, हम देखते रह गये उनके चेहरे को जब वो निगाहे मिलाकर हमसे निगाहे चुराने लगे ।

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