सिखाने वाले दूसरों को सबक़ ज़िंदगी से लेना भूल गये,देखते रहे सिक्के के एक पहलू को मगर ख़ुद दूसरा पहलू आज़माना भूल गये ।

सिखाने वाले दूसरों को सबक़ ज़िंदगी से लेना भूल गये,देखते रहे सिक्के के एक पहलू को मगर ख़ुद दूसरा पहलू आज़माना भूल गये ।

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