फना ए इशक मे रखा क्या है ... बेआबरू कर रहे तेरे ही अपने.. फिर गिर गिर कर समभलना क्या है !"

फना ए इशक मे रखा क्या है ... बेआबरू कर रहे तेरे ही अपने.. फिर गिर गिर कर समभलना क्या है !"

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