कश्ती तो मिली मगर वक़्त प किनारा न मिला,देखते रह गये उस माँझी को जिसको दर्द में अपनो का सहारा न मिला ।

कश्ती तो मिली मगर वक़्त प किनारा न मिला,देखते रह गये उस माँझी को जिसको दर्द में अपनो का सहारा न मिला ।

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