श्याही नही रखूँगी तेरा नाम... क्या पता कब तू फैल जाऐ पन्नों पे ग़ैरों की तरह !

श्याही नही रखूँगी तेरा नाम... क्या पता कब तू फैल जाऐ पन्नों पे ग़ैरों की तरह !

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