ज़िंदगी गुज़र गयी और हम वक़्त को देखते रह गये, एक एक क़दम रखते रहे ज़मीन प सोचकर जैसे समंदर में रहकर किनारे को देखते रह गये ।

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ज़िंदगी गुज़र गयी और हम वक़्त को देखते रह गये, एक एक क़दम रखते रहे ज़मीन प सोचकर जैसे समंदर में रहकर किनारे को देखते रह गये ।

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